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M.Phil (एमफिल) कोर्स क्या है कैसे करें [2022] | योग्यता, फीस, सैलरी, जॉब, करियर

M.Phil kya hai kaise kare – पूरी जानकारी पायें 

नमस्कार दोस्तों! Ayush Arena में आपका स्वागत है।

आज हम आपको M.Phil से जुड़ी सारी जानकारी देंगे। जैसे M.Phil kya hai kaise kare, M.Phil full form, eligibility और fees.

इसके अलावा आप M.Phil course duration, admission process, career options and salary after M.Phil भी जानेंगे।

अगर आप भी एमफिल करना चाहते हैं या एक अच्छे करियर की तलाश में हैं पर आपको नहीं पता कि M.Phil kya hai kaise kare तो ये आर्टिकल आपको बहुत मदद करेगा।

आज इतना तगड़ा कॉम्पिटिशन है कि ग्रेजुएशन या पोस्ट ग्रेजुएशन करना भी इस बात की गारंटी नहीं है कि आपको एक अच्छी नौकरी मिलेगी।

ऐसे में अगर आप M.Phil जैसी पढ़ाई करते हैं तो भीड़ में अलग नजर आते हैं। इसके साथ-साथ आपके पास बहुत सी अच्छी नौकरियों के विकल्प खुल जाते हैं। यानि M.Phil karne ke fayde ही फायदे हैं।

बहुत से स्टूडेंट्स को यह कन्फ्यूजन भी रहता है कि एमफिल और पीएचडी में क्या अंतर है। यह सब जानने के लिए आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़िए।

M.Phil kya hai (एमफिल क्या है ?)

यह दो साल का कोर्स होता है। इसे पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद किया जाता है।

M.Phil kya hota hai
M.Phil kya hota hai

इसमें आप अपने सब्जेक्ट के बारे में न सिर्फ थ्योरी बल्कि प्रेक्टिकल और रिसर्च के पाइंट ऑफ व्यू (नजरिए) से भी पढ़ाई करते हैं।

आप रेग्युलर या डिस्टेंस लर्निंग दोनों तरह से एमफिल कर सकते हैं। आपने पोस्ट ग्रेजुएशन में जो सब्जेक्ट लिया था उसी में एमफिल कर सकते हैं।

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M.Phil का ऑप्शन आपको सरकारी और प्राइवेट दोनों ही कॉलेज और यूनिवर्सिटीज में मिल सकता है।

M.Phil का Full form

M.Phil का full form होता है Master of Philosophy.

इसे हिन्दी में मास्टर ऑफ फिलॉसफी कहते हैं। आम बोलचाल में एमफिल शब्द ही इस्तेमाल किया जाता है।

M.Phil के लिए योग्यता (Eligibility)

  • एमफिल करने के लिए आपको पहले पोस्ट ग्रेजुएशन करना होता है।
  • पोस्ट ग्रेजुएशन में 55% नंबर होने चाहिए।
  • आरक्षित वर्ग के लिए 5% की छूट होती है।
    अगर आपने NET, SET या GATE जैसे एग्जाम क्लीयर किए हों तो भी मिनिमम नंबर में कुछ छूट मिल जाती है।
  • आप किसी भी स्ट्रीम से पोस्ट ग्रेजुएशन करके एमफिल कर सकते हैं।
  • अगर आपने एमए, एमकॉम या एमएससी किया हो तो भी आप एमफिल के लिए एलिजिबिलिटी (योग्यता) को पूरा करते हैं।
  • M.Phil करने के लिए कोई एज लिमिट नहीं है।

तो ये थी M.Phil की eligibility. आगे पढ़िए M.Phil admission process, career options और M.Phil karne ke fayde

M.Phil कोर्स कितने साल का होता है ?

एमफिल की course duration दो साल होती है। कुछ यूनिवर्सिटीज इसे चार सेमेस्टर में बांटती हैं।

इन दो सालों में स्टूडेंट को अपने सब्जेक्ट की बहुत डीटेल में पढ़ाई करनी होती है।

अपने विषय से जुड़ी रिसर्च करके उसके नतीजे तैयार करने पड़ते हैं। और इस पर लगभग 100 पेज का dissertation बनाकर लिखना होता है।

इनके आधार पर ये कहा जा सकता है कि M.Phil, Ph.D का एक छोटा रूप है। इसे करके आप खुद को Ph.D करने के लिए मानसिक रूप से तैयार कर सकते हैं।

M.Phil कोर्स में एडमिशन कैसे लें ?

M.Phil admission process हर यूनिवर्सिटी के अनुसार अलग हो सकता है।

ज्यादातर यूनिवर्सिटीज लिखित परीक्षा और इंटरव्यू के बाद एमफिल में एडमिशन देती हैं। कुछ यूनिवर्सिटीज NET, GATE जैसे एग्जाम क्वालीफाई कर चुके उम्मीदवारों को सिर्फ इंटरव्यू के आधार पर एडमिशन देती हैं।

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कुछ यूनिवर्सिटीज पोस्ट ग्रेजुएशन के मार्क्स के आधार पर भी एडमिशन देती हैं।

इसके अलावा एक RET यानि रिसर्च एन्ट्रेंस टेस्ट भी आयोजित किया जाता है। यह पीएचडी और एमफिल दोनों के लिए कॉमन टेस्ट होता है। इसमें हायर स्कोर लाने वाले स्टूडेंट्स पीएचडी के लिए सलेक्ट होते हैं। जबकि बाकी एमफिल के लिए चुने जाते हैं।

M.Phil कोर्स की फीस कितनी है ?

M.Phil ki fees में आपके सब्जेक्ट और हर यूनिवर्सिटी के नियम अनुसार थोड़ा-बहुत अंतर हो सकता है। फिर भी औसतन एक सरकारी इंस्टीट्यूट में M.Phil का कुल खर्च लगभग 20-50,000 रुपए आता है।

वहीं प्राइवेट इंस्टीट्यूट से M.Phil का कुल खर्च 3-5 लाख हो सकता है।

M.Phil के बाद सैलरी ?

एमफिल के बाद सैलरी आपकी जॉब और नॉलेज के हिसाब से होती है। फिर भी आपको 25-30,000 रुपए तक की जॉब आसानी से मिल जाएगी।

जैसे-जैसे आप अपना एक्सपीरियंस बढ़ाते जाते हैं, आपकी सैलरी बढ़ती जाती है। कुछ ही सालों में आप 50-60,000 रुपए महीना तक पंहुच सकते हैं।

M.Phil kya hai kaise kare
M.Phil kya hai kaise kare

दोस्तों M.Phil kya hota hai kaise kare इसको समझने के लिए आप यह आर्टिकल पूरा पढ़िए। आगे आपके काम की और भी जानकारी दी गई है।

M.Phil के बाद करियर आप्शन

M.Phil के बाद career options की कोई कमी नहीं होती है।

आप चाहें तो आगे पढ़ाई जारी रखते हुए Ph.D कर सकते हैं।

यदि जॉब की बात करें तो आपके पास टीचिंग का रास्ता तो होता ही है।

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इसके अलावा आप रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D), पीएसयू, मीडिया जैसे क्षेत्रों में शानदार करियर बना सकते हैं।

एमफिल करके आप एक एक्सपर्ट के तौर पर जाने जाते हैं। इसलिए एक एडवाइजर की तरह कई संस्थानों में अपनी सेवा दे सकते हैं।

यह आपके सब्जेक्ट पर निर्भर है। जैसे कि सामाजिक अध्ययन (social study) और लॉ जैसे विषयों से एमफिल करके आप एनजीओ के साथ जुड़ सकते हैं।

यदि आपने कॉमर्स के किसी विषय से एमफिल किया है तो आप फाइनेंस इंस्टीट्यूट में एडवाइजर बन सकते हैं।

इसी तरह अपने सब्जेक्ट की फील्ड से जुड़ी कंसल्टेंसी भी जॉइन कर सकते हैं। आप एक गेस्ट स्पीकर या पब्लिक स्पीकर के रूप में भी खुद को स्थापित कर सकते हैं।

आप अपने विषय से जुड़ी किताबें लिख सकते हैं। यानि M.Phil करने के बाद career options इतने हैं कि आप खाली नहीं बैठेंगे।

M.Phil करने के फायदे

आपने M.Phil kya hai, इसका full form, eligibility और admission process समझ लिया है।

अब हम आपको M.Phil karne ke fayde बताते हैं।

  • M.Phil करके Ph.D करना ज्यादा आसान हो जाता है। क्योंकि कुछ यूनिवर्सिटीज अपने पीएचडी प्रोग्राम में एमफिल किए कैंडिडेट को प्राथमिकता देती हैं।
  • आप टीचिंग और रिसर्च फील्ड में जा सकते हैं।
  • जिस सब्जेक्ट में आपने एमफिल किया है, आप उसके एक्सपर्ट बन जाते हैं।
  • एमफिल करते हुए आपको अच्छी स्टाइपेंड मिलती है।
  • एमफिल एक हायर लेवल की डिग्री है। इसलिए जो लोग M.Phil करते हैं, उनको बहुत सम्मान दिया जाता है।
  • आपमें सेल्फ कांफिडेंस बढ़ता है।

M.Phil और Ph.D में क्या अंतर है?

दोस्तों ये जानकारी बहुत ध्यान से पढ़िएगा। बहुत से स्टूडेंट्स का यह सवाल होता है कि एमफिल और पीएचडी में क्या अंतर होता है।

हमने इसे विस्तार से समझाया है। इसे पढ़कर आपको एमफिल और पीएचडी में अंतर पूरी तरह क्लीयर हो जाएगा।

  1. एमफिल के लिए 2 साल का समय लगता है जबकि पीएचडी के लिए  3-6 साल लगते हैं।
  2. M.Phil करके आपको Master of Philosophy की डिग्री मिलती है। जबकि Ph.D करके आप Doctor of Philosophy कहलाते हैं।
  3. इसलिए पीएचडी करके आप अपने नाम के आगे डॉक्टर लगा सकते हैं। पर एमफिल के बाद ऐसा नहीं कर सकते।
  4. M.Phil में रिसर्च का लेवल छोटा होता है जबकि पीएचडी में रिसर्च बहुत बड़े लेवल पर की जाती है।
  5. एमफिल एक पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री है जबकि पीएचडी हाइएस्ट डिग्री है।
  6. एमफिल में कई रिसर्च वर्क को कंबाइंड करके dissertation लिखा जा सकता है। पीएचडी की थीसिस आपके अपने ओरिजिनल रिसर्च पर आधारित होनी चाहिए।

M.Phil kya hai kaise kare

  • M.Phil दो साल का डिग्री कोर्स है।
  • M.Phil का full form होता है Master of Philosophy.
  • इसे पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद किया जाता है।
  • इसके लिए एक लिखित परीक्षा और इंटरव्यू देना होता है।
  • NET और GATE जैसे एग्जाम क्वालीफाई करने पर आपको लिखित परीक्षा से छूट मिल सकती है।
  • कुछ यूनिवर्सिटीज पोस्ट ग्रेजुएशन के नंबरों के आधार पर भी एडमिशन देती हैं।
  • आप सिर्फ अपने पोस्ट ग्रेजुएशन के सब्जेक्ट में ही एमफिल कर सकते हैं।
  • एमफिल के कुछ टॉप इंस्टीट्यूट JNU, DU, पंजाब यूनिवर्सिटी, BHU, AMU, जामिया मिलिया इस्लामिया, Christ University, टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस हैं।
  • M.Phil के बाद आपको टीचिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, पीएसयू, एनजीओ जैसी फील्ड में अच्छे career options मिलते हैं।
  • एमफिल करने की कोई एज लिमिट नहीं है।

निष्कर्ष

दोस्तों, इस आर्टिकल में आपने जाना M.Phil kya hai kaise kare? उम्मीद है कि आपको अपने सवालों के जवाब मिल गए होंगे जैसे कि M.Phil ka full form kya hai, eligibility, course duration, admission process, fees, salary, career options और M.Phil karne ke fayde kya hai.

आपको यह भी अच्छी तरह समझ आ गया होगा कि M.Phil और Ph.D में क्या अंतर है।

अगर आपके मन में कोई सवाल है तो कमेंट सेक्शन में बताएं।

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Article by – Nidhi Neer

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