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Parts of Speech in Hindi | आसान भाषा में Parts of Speech की पूरी जानकारी | पार्ट्स ऑफ़ स्पीच हिंदी में

Parts of Speech in Hindi || हिंदी में Parts of Speech

नमस्कार, आप सबका आज के हमारे इस आर्टिकल में स्वागत है। आज का हमारा यह आर्टिकल पार्ट्स ऑफ स्पीच पर आधारित है। आज हम हिंदी में पार्ट्स ऑफ स्पीच की पूरी जानकारी आपको देने वाले हैं।

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इस आर्टिकल के अंत तक आपको हिंदी पार्ट्स ऑफ स्पीच की पूरी जानकारी प्राप्त हो जाएगी। जो कि बिल्कुल आसान भाषा में होगी जिससे कि आपको सबकुछ तुरंत समझ आ जाएगा , इसीलिए आर्टिकल को पूरा जरुर पढियेगा |

आप सभी लोगों ने इंग्लिश पार्ट्स ऑफ स्पीच को जरूर पढ़ा होगा। जिस तरह से इंग्लिश में आठ प्रकार के पार्ट्स ऑफ स्पीच होते हैं। ठीक उसी तरह से हिंदी में भी कुल 8 प्रकार ही होते हैं- पार्ट्स ऑफ स्पीच के।

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आइए जानते हैं कि हिंदी के पार्ट्स ऑफ स्पीच कौन-कौन से हैं-

  1. Noun- संज्ञा
  2. Pronoun- सर्वनाम
  3. Adjective- विशेषण
  4. Verb- क्रिया
  5. Adverb- क्रिया विशेषण
  6. Preposition- संबंधसूचक अव्यय
  7. Conjunction- समुच्चय बोधक
  8. Interjection- विस्मयसूचक/ विस्मयादिबोधक

ऊपर हमने अंग्रेजी के पार्ट्स ऑफ स्पीच के नाम को लिखा है एवं उसके पास में ही हमने हिंदी पार्ट्स ऑफ स्पीच के भी नाम को लिखा है। ताकि आपको हिंदी पार्ट्स ऑफ स्पीच के टर्म को समझने में आसानी हो।

अब हम एक-एक करके Parts of Speech in Hindi  पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

Table of Contents

Parts of Speech in Hindi – संज्ञा (Noun) –

Noun को हिंदी में संज्ञा कहा जाता है। आइए जानते हैं संज्ञा की परिभाषा को-

संज्ञा – वे शब्द जो किसी व्यक्ति, प्राणी वस्तु या भाव के नाम बताते हैं उन्हें ही संज्ञा कहा जाता है। संज्ञा के कुल पांच भेद होते हैं-

  • व्यक्तिवाचक संज्ञा
  • जातिवाचक संज्ञा
  • द्रव्यवाचक संज्ञा
  • समूहवाचक संज्ञा
  • भाववाचक संज्ञा

व्यक्तिवाचक संज्ञा

1. व्यक्तिवाचक संज्ञा– व्यक्तिवाचक संज्ञा वह संज्ञा शब्द होते हैं जिनसे किसी विशेष व्यक्ति, स्थान या वस्तु का पता चलता है।

जैसे- नरेंद्र मोदी, ममता बनर्जी, दिल्ली, ऑस्ट्रेलिया, गंगा, यमुना, माउंट आबू, फुटबॉल, जनवरी इत्यादि।

यह सभी उदाहरण किसी विशेष व्यक्ति, विशेष स्थान,किसी विशेष वस्तु महीने के हैं।

जातिवाचक संज्ञा

2. जातिवाचक संज्ञा– जातिवाचक संज्ञा व संज्ञा शब्द है जिससे किसी व्यक्ति, प्राणी, वस्तु या स्थान की पूरी जाति का पता चलता है उन्हें ही जातिवाचक संज्ञा कहा जाता है।

जैसे- पेड़, फल, सब्जी आदि प्रकृति से संबंधित जातिवाचक संज्ञा का उदाहरण है।

मोर, बंदर, बिल्ली आदि पशु-पक्षी से संबंधित जातिवाचक संज्ञा का उदाहरण है।
जातिवाचक संज्ञा का भेद होता है-

द्रव्यवाचक संज्ञा

3. द्रव्यवाचक संज्ञा– द्रव्यवाचक संज्ञा वे संज्ञा शब्द होते हैं जिनसे किसी सामग्री किसी धातु या फिर किसी द्रव्य के बारे में पता चलता है, उन्हें ही द्रव्यवाचक संज्ञा कहा जाता है।

जैसे- सोना, चांदी, चावल, गेहूं, आटा इत्यादि।

समूहवाचक संज्ञा

4. समूहवाचक संज्ञा– समूहवाचक संज्ञा वे संज्ञा शब्द होते हैं जिनसे किसी विशेष समूह ,विशेष समाज या समुदाय का पता चलता है उन्हें ही समूहवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- भारतीय वायु सेना, चुनाव आयोग इत्यादि।

भाववाचक संज्ञा

5. भाववाचक संज्ञा– भाववाचक संज्ञा से तात्पर्य संज्ञा के उन शब्दों से हैं जिनके माध्यम से किसी व्यक्ति, प्राणी, स्थान के गुण, दोष भाव, दशा या स्थिति का पता चलता है उन्हें ही भाववाचक संज्ञा कहते हैं।

जैसे- सुंदरता,बचपन, सुगंध, मोटाई, इत्यादि।

 

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Parts of Speech in Hindi  – सर्वनाम (Pronoun)

Pronoun को ही हिंदी में सर्वनाम कहा जाता है। आइए जानते हैं सर्वनाम की परिभाषा को-

सर्वनाम – संज्ञा की जगह जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है, उन्हें ही सर्वनाम कहा जाता है।

मैं,तुम,हम इत्यादि सर्वनाम के शब्द है। इन शब्दों का प्रयोग आमतौर पर संज्ञा के शब्दों के स्थान पर ही किया जाता है।

सर्वनाम के शब्दों में एकवचन एवं बहुवचन होते हैं। जैसे-

  • एकवचन बहुवचन
  • वह           वे
  • इसे         इन्हें
  • उसका      उन्हें
  • मैं           हम

सर्वनाम के कुल 6 भेद होते हैं-

  • पुरुषवाचक सर्वनाम
  • निश्चयवाचक सर्वनाम
  • अनिश्चयवाचक सर्वनाम
  • प्रश्नवाचक सर्वनाम
  • निजवाचक सर्वनाम
  • संबंधवाचक सर्वनाम

पुरुषवाचक सर्वनाम

1. पुरुषवाचक सर्वनाम– पुरुषवाचक सर्वनाम से तात्पर्य उन सर्वनाम शब्द से है जो बोलने वाले, सुनने वाले तथा दूसरे व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है ऐसे ही सर्वनाम शब्दों को पुरुषवाचक सर्वनाम कहा जाता है।

जैसे- मैं, तुम, आप, इत्यादि।

पुरुषवाचक सर्वनाम के 3 भेद होते हैं-

उत्तम पुरुष सर्वनाम

उत्तम पुरुष सर्वनाम- जब व्यक्ति किसी शब्द का प्रयोग खुद के लिए करता है, वहां उत्तम पुरुष सर्वनाम होता है। जैसे- मैं, मैंने, मुझको इत्यादि।

मध्यम पुरुष सर्वनाम

मध्यम पुरुष सर्वनाम- जब कोई व्यक्ति किसी की बात सुनकर उससे बातचीत करना आरंभ करता है वहां पर मध्यम पुरुष सर्वनाम होता है। जैसे- तुमको, आपको, तुम इत्यादि।

अन्य पुरुष सर्वनाम

अन्य पुरुष सर्वनाम- वे सर्वनाम शब्द जिनका प्रयोग ना ही बोलने वाले व्यक्ति के लिए होता है और ना ही सुनने वाले व्यक्ति के लिए बल्कि उन शब्दों का प्रयोग किसी और के लिए होता है वहां ही अन्य पुरुष सर्वनाम होता है। जैसे- वह,यह इत्यादि।

निश्चयवाचक सर्वनाम

2. निश्चयवाचक सर्वनाम– वे सर्वनाम शब्द जिनका प्रयोग किसी निश्चित व्यक्ति या फिर किसी निश्चित वस्तु के लिए किया जाता है, उन्हें ही निश्चयवाचक सर्वनाम कहा जाता है।

निश्चयवाचक सर्वनाम को संकेतवाचक सर्वनाम के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि निश्चयवाचक सर्वनाम में किसी विशेष के ऊपर ही संकेत करके ही बातें होती हैं।

जैसे- भाई साहब मुझे यह सफेद रसगुल्ला दे दीजिए।

उपयुक्त उदाहरण में रसगुल्ला के और ही संकेत किया गया है।

अनिश्चयवाचक सर्वनाम

3. अनिश्चयवाचक सर्वनाम– वे सर्वनाम शब्द जो किसी निश्चित व्यक्ति या किसी वस्तु की जानकारी नहीं देते उन्हें अनिश्चयवाचक सर्वनाम कहा जाता है।

जैसे- मैंने बहुत ढूंढा परंतु मुझे कुछ भी जमीन पर नहीं दिखा।

प्रश्नवाचक सर्वनाम

4. प्रश्नवाचक सर्वनाम– जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग प्रश्नों को पूछने के लिए किया जाता है उन्हें प्रश्नवाचक सर्वनाम कहा जाता है।

  • जैसे- कौन शोर मचा रहा था?,
  • दीवार के पीछे कौन खड़ा है?

निजवाचक सर्वनाम

5. निजवाचक सर्वनाम– वे सर्वनाम शब्द जो काम करने वाला अपने लिए ही प्रयोग करता है उन्हें निजवाचक सर्वनाम कहा जाता है।

जैसे- मैं अपने सारे काम खुद ही करता हूं, तुम्हें भी अपना काम स्वयं करना चाहिए।

संबंधवाचक सर्वनाम

6. संबंधवाचक सर्वनाम– वे सर्वनाम शब्द जो वाक्य में आने वाले दूसरे संज्ञा या सर्वनाम शब्द से जुड़े रहते हैं, ऐसे शब्दों को संबंधवाचक सर्वनाम कहा जाता है।

  • जैसे- जैसी करनी वैसी भरनी।
  • बुरे कर्म का फल बुरा ही होता है।

 

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Parts of Speech in Hindi  – विशेषण (Adjective)

Adjective  हिंदी में विशेषण कहां जाता है। आइए जानते हैं विशेषण की परिभाषा को-

विशेषण – जो शब्द संज्ञा एवं सर्वनाम शब्दों की विशेषता बताते हैं उन्हें ही विशेषण कहा जाता है।

जैसे- ईमानदार नेता। लाल पतंग।

विशेषण के आठ भेद होते हैं-

  1. गुणवाचक विशेषण
  2. संख्यावाचक विशेषण
  3. परिणाम वाचक विशेषण
  4. सार्वनामिक विशेषण
  5. व्यक्तिवाचक विशेषण
  6. संबंध वाचक विशेषण
  7. तुलना बोधक विशेषण
  8. प्रश्नवाचक विशेषण

आइये इन सबके बारे में एक-एक कर जानते है –

गुणवाचक विशेषण –

गुणवाचक विशेषण– विशेषण के वे शब्द जो संज्ञा या सर्वनाम के शब्दों के रूप, रंग ,आकार, प्रकार, दोष तथा गुण इत्यादि को बताते हैं उन्हें ही गुणवाचक विशेषण कहा जाता है।

  • जैसे-  छोटा बच्चा हंस रहा है।
  • आसमान में काले बादल छाए हुए है।

संख्यावाचक विशेषण

2. संख्यावाचक विशेषण– विशेषण के जिन शब्दों से संज्ञा या सर्वनाम के संख्या या गिनती का पता चलता है, उन्हें संख्यावाचक विशेषण कहते हैं।

  • जैसे- टेबल पर दो किताबें रखी हुई है।
  • मेरे ऑफिस में 100 कर्मचारी काम करते हैं।

परिणाम वाचक विशेषण

3. परिणाम वाचक विशेषण– विशेषण के जिन शब्दों से संज्ञा या सर्वनाम का परिमाण अर्थात माप- तौल का पता चलता है, उन्हें परिणाम वाचक विशेषण कहते हैं।

दूसरे शब्दों में यदि कहा जाए तो वह वस्तु या सामान जिन्हें कभी भी गिना नहीं जा सकता है, बल्कि तौला जा सकता है, ऐसे ही वस्तु को परिणाम वाचक विशेषण कहा जाता है।

  • जैसे- 1 लीटर पानी।
  • 5 केजी आलू।

सार्वनामिक विशेषण

4. सार्वनामिक विशेषण– संज्ञा से पहले जो सर्वनाम शब्द जुड़ते हैं एवं उसकी विशेषता बताते हैं, उन्हें ही सार्वनामिक विशेषण के नाम से जाना जाता है।

  • जैसे- यह लड़का हमेशा अच्छा काम करता है।
  • वह लड़की मेरी पड़ोसी है।

व्यक्तिवाचक विशेषण

5. व्यक्तिवाचक विशेषण– व्यक्ति वाचक विशेषण वो विशेषण होते है जिनकी उत्पत्ति व्यक्ति वाचक संज्ञा द्वारा होती है

  • जैसे- शादी में दुल्हन बनारसी साड़ी ही पहनती है।
  • मुझे आपका यह अंदाज बेहद पसंद है।

संबंधवाचक विशेषण

6. संबंध वाचक विशेषण– वे विशेषण शब्द जो किसी वस्तु या व्यक्ति की तुलना किसी अन्य व्यक्ति या वस्तु के साथ करते हैं, उन्हें ही संबंध वाचक विशेषण कहा जाता है।

  • जैसे- उसके दांत में कीड़ा लगने के कारण दर्द हो रहा है।
  • जिनका मन साफ होता है, वे ऊपर से हमेशा कठोर नजर आते हैं।

तुलना बोधक विशेषण

7. तुलना बोधक विशेषण– वे विशेषण शब्द जो संज्ञा एवं सर्वनाम शब्दों की विशेषता बताते हैं। कई बार यह विशेषता के स्थान पर गुण एवं दोषों की भी चर्चा करते हैं।

कहने का तात्पर्य जिन शब्दों के माध्यम से किसी वस्तु की तुलना की जाती है, उन्हें तुलना बोधक विशेषण कहा जाता है।

  • जैसे- मेरी मां शेरनी जैसी निडर है।
  • लता मंगेशकर एक बहुत अच्छी गायिका है।

प्रश्नवाचक विशेषण

8. प्रश्नवाचक विशेषण– विशेषण के वे शब्द जो संज्ञा एवं सर्वनाम शब्दों के बारे में प्रश्न के माध्यम से जानने का प्रयास करते हैं, उन्हें ही प्रश्नवाचक विशेषण कहां जाता है।

  • जैसे- तुम किस विषय में बात कर रही हो?
  • मुझे नहीं मालूम कि वह कौन था?

 

इसे भी पढ़े – समास किसे कहते हैं ? समास की परिभाषा?

Parts of Speech in Hindi  – क्रिया (Verb)

Verb को हिंदी में क्रिया कहा जाता है। आइए जानते हैं क्रिया की परिभाषा को-

क्रिया – जिन शब्दों से किसी काम के करने या होने का पता चलता है, उन्हें ही क्रिया कहा जाता है।

  • जैसे- बाहर हवा चल रही है।
  • बच्चा खेल रहा है।

अगर हम क्रिया के भेद कि बात करे तो ये दो तरह के होते है –

काम करने वाला व्यक्ति कर्ता होता है। कर्ता जो काम को करता है उसे क्रिया कहते हैं। क्रिया का असर जिन पर पड़ता है उन्हें कर्म कहते हैं। इसलिए कर्मों के आधार पर, रचनाओं के आधार पर क्रिया को मूल रूप से दो भागों में बांटा गया है।

अकर्मक क्रिया-

1. अकर्मक क्रिया– अकर्मक क्रिया वह क्रिया है, जिसमें क्रिया का फल कर्म पर ना पड़कर कर्ता पर पड़ता है, उन्हें अकर्मक क्रिया कहा जाता है।

  • जैसे- रोहन सो रहा है।
  • मोहन नहा रहा है।

सकर्मक क्रिया

2. सकर्मक क्रिया– सकर्मक क्रिया वह क्रिया है जिनके साथ कर्म भी होता चला जाता है, उन्हें सकर्मक क्रिया कहते हैं।

  • जैसे- शुभम आइसक्रीम खा रहा है।
  • मोना कबड्डी खेल रही है।

सकर्मक क्रिया के दो भेद होते हैं-

एककर्मक क्रिया

एककर्मक क्रिया– जहां एक ही काम हो रहा होता है, वहां एककर्मक क्रिया होता हैं।

जैसे– रोहन काम कर रहा है।

द्विकर्मक क्रिया

द्विकर्मक क्रिया– जहां दो काम के होने का पता चलता है, वहां द्विकर्मक क्रिया होता है।

जैसे– राम ने श्याम को पैसा दिया।

इसे भी पढ़े – समास किसे कहते हैं ? समास की परिभाषा |

Parts of Speech in Hindi  – क्रिया विशेषण (Adverb)

Adverb को हिंदी में क्रिया विशेषण कहा जाता है। आइए जानते हैं क्रिया विशेषण की परिभाषा को-

क्रिया विशेषण – क्रिया विशेषण उन्हें कहा जाता है जिसके द्वारा हमे किसी भी क्रिया की विशेषता मालूम चलती है

जैसे- घोड़ा तेज दौड़ता है।

क्रिया विशेषण के मुख्य रूप से चार भेद होते हैं-

कालवाचक क्रिया विशेषण-

1. कालवाचक क्रिया विशेषण– क्रिया विशेषण के वे शब्द जो काम के होने के बारे में बताते हैं उन्हें कालवाचक क्रिया विशेषण कहा जाता है।

जैसे- कल बरसात होगी।

रीतिवाचक क्रिया विशेषण

2. रीतिवाचक क्रिया विशेषण- क्रिया विशेषण के वे शब्द जिनसे काम कैसे होता है उसके होने के तरीके का पता चलता है, उसे रीतिवाचक क्रिया विशेषण कहां जाता है।

  • जैसे- रमेश कभी झूठ नहीं बोलता है।
  • आशा मन लगाकर पढ़ाई करती हैं।

स्थान वाचक क्रिया विशेषण

3. स्थान वाचक क्रिया विशेषण– क्रिया विशेषण के वे शब्द जिनसे क्रिया के होने का पता चलता है, उन्हें स्थान वाचक क्रिया विशेषण कहते हैं।

  • जैसे- हम आंगन में सोते हैं।
  • मैं खेत में जाता हूं।

परिणाम वाचक क्रिया विशेषण-

4. परिणाम वाचक क्रिया विशेषण– क्रिया विशेषण के वे शब्द जिनसे संख्या या परिमाण का बोध होता हो, उन्हें परिणाम वाचक क्रिया विशेषण कहते हैं।

  • जैसे- तुम ज्यादा खाना खाया करो।
  • हर व्यक्ति को चार-पांच घंटे अवश्य सोना चाहिए।

 

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Parts of Speech in Hindi  – संबंधसूचक अव्यय (Preposition)

Preposition हिंदी में संबंध सूचक अव्यय कहां जाता है। आइए जानते हैं संबंध सूचक अव्यय की परिभाषा को-

संबंध सूचक अव्यय वे शब्द होते हैं जिन्हें आमतौर पर संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के पहले लगाया जाता है ताकि पूरे वाक्य का संबंध पता चले।

  • जैसे- मैं कल तुम्हारे घर जाऊंगा।
  • रविवार को मेरी छुट्टी है।

संबंध सूचक अव्यय के मुख्य रूप से 10 प्रकार होते हैं-

कालवाचक

1. कालवाचक– ऐसे संबंध सूचक अव्यय शब्द जिनसे समय का पता चलता हो उन्हें कालवाचक कहा जाता है।
जैसे- कल, परसों, आगे, बाद में आदि।

स्थानवाचक

2. स्थानवाचक– ऐसे संबंध सूचक अव्यय शब्द जिनसे किसी स्थान का पता चलता है, उन्हें स्थान वाचक कहा जाता है।
जैसे- दूर, पास, बाहर आदि।

दिशा वाचक

3. दिशा वाचक– ऐसे संबंध सूचक अव्यय शब्द जिनसे किसी दिशा का पता चलता हो, उन्हें दिशा वाचक कहा जाता है।
जैसे- उत्तर, दक्षिण,पूर्व,पश्चिम आदि।

साधन वाचक

4. साधन वाचक– ऐसे संबंध सूचक अव्यय शब्द जिनके माध्यम से किसी स्रोत का पता चलता हो,उन्हें साधन वाचक कहा जाता है।
जैसे- उसके द्वारा, उसके कारण आदि।

समता वाचक

5. समता वाचक– समता वाचक भी बिल्कुल साधन वाचक जैसे ही होते हैं। जैसे- उसकी तरह, उसके जैसे आदि।

विरोध वाचक

6. विरोध वाचक– ऐसे संबंध सूचक अव्यय शब्द जो संज्ञा, सर्वनाम और क्रिया के मध्य विरोध होने के संकेत देते हैं उन्हें विरोध वाचक कहा जाता है। जैसे- विपक्ष, विरूद्ध आदि।

हेतु वाचक

7. हेतु वाचक– ऐसे संबंध सूचक अव्यय शब्द जिनसे किसी उद्देश्य का पता चलता हो, उन्हें हेतु वाचक कहां जाता है। जैसे- बिना, लिए आदि।

सहचर वाचक

8. सहचर वाचक– ऐसे संबंध सूचक अव्यय शब्द जिनके माध्यम से सहचर्य का संकेत मिलता हो, उन्हें सहचर वाचक कहा जाता है। जैसे- साथी, संगी आदि।

संग्रह वाचक

9. संग्रह वाचक– ऐसे संबंध सूचक अव्यय शब्द जिनसे किसी चीज के संकलन यह संग्रहीत होने का संकेत मिलता है उसे संग्रह वाचक कहते हैं। जैसे- समस्त, भरकर आदि।

तुलना वाचक

10. तुलना वाचक– ऐसे संबंध सूचक अव्यय शब्द जिनसे किसी चीज की तुलना का पता चलता हो उन्हें तुलना वाचक कहा जाता है।
जैसे- अच्छा, बुरा, डरावना आदि।

 

इसे भी पढ़े – व्याकरण (Vyakaran) किसे कहते है ?

Parts of Speech in Hindi  – समुच्चय बोधक (Conjunction)

Conjunction को हिंदी में संयोजक कहा जाता है। आइए जानते हैं संयोजक की परिभाषा को-

संयोजक – समुच्चय बोधक (संयोजक)  वे शब्द होते हैं जो शब्दों को या वाक्यों को आपस में जोड़ते हैं।

जैसे- रमा अच्छा खेलती है और विनित भी अच्छा खेलता है।

ऊपर दिए गए उदाहरण में एक ही बात लंबे तरीके से कहा गया है। इसी बात को यदि ऐसे कहा जाए- रमाऔर विनीत दोनों अच्छा खेलते हैं। यहां पर 2 वाक्य एक साथ जोड़ दिए गए हैं। अतः यह समुच्चय बोधकवाक्य है।

समुच्चय बोधक के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं-

संयोजन

1. संयोजन– संयोजन नाम से ही पता चल रहा है इसमें कुछ जोड़ने वाला है।संयोजन में दो से अधिक वाक्य को जोड़कर एक नए अर्थ का निर्माण होता है।

जैसे- बैगन और आलू दोनों सब्जी है।

विभाजक

2. विभाजक– विभाजक नाम से यह पता चल रहा है कि कुछ विभाग या विभक्त अर्थात अलग होने वाला है।वे शब्द या वाक्य जो वाक्यों को या शब्दों को दो से अधिक भागों में भाग कर देते हैं, उन्हें विभाजक कहा जाता है।

जैसे- तुम सुबह से पढ़ाई कर रहे हो लेकिन अभी तक तुमने कुछ भी ठीक से नहीं पढ़ा।

3. विकल्प सूचक– विकल्प अर्थात चयन करना। वे वाक्य या शब्द जिनमें विकल्प मिले उन्हें विकल्प सूचक कहते हैं।

जैसे- मेहनत करो वरना सफल नहीं हो पाओगे।

Parts of Speech in Hindi  – विस्मयसूचक/ विस्मयादिबोधक (Interjection)

Interjection को ही हिंदी में विस्मयादिबोधक अव्यय कहां जाता है। आइए जानते है विस्मयादिबोधक अव्यय की परिभाषा को-

विस्मयादिबोधक – जिन शब्दों से किसी भाव जैसे- शोक, उल्लास, नफरत, खुशी इत्यादि का पता चलता है, उन्हें विस्मयादिबोधक कहते हैं। विस्मयादिबोधक अव्यय का चिन्ह् (!)ऐसा होता है।

  • जैसे- हाय! मैं मर गई।
  • वाह! क्या गाया है।

विस्मयादिबोधक अव्यय के कुल 10 भेद होते हैं-

शोक बोधक

1. शोक बोधक– जिन वाक्यों से शोक का पता चले उन्हें शोक बोधक कहा जाता है।

जैसे- उफ़!, बापरे!, हाय! आदि।

तिरस्कार बोधक

2. तिरस्कार बोधक– जिन वाक्यों से तिरस्कृत होने का बोध होता है उन्हें तिरस्कार बोधक कहा जाता है।

जैसे- हत!, धिक्कार! आदि।

स्वीकृति बोधक

3. स्वीकृति बोधक– जिन शब्दों से किसी चीज को स्वीकार किया जाता है, वहां स्वीकृति बोधक होता है।

जैसे- हां!, जी!, ठीक है! आदि।

संबोधन बोधक

4. संबोधन बोधक– जिन शब्दों से किसी को संबोधन किया जाता हो वहां संबोधन बोधक होता है।

जैसे- नमस्ते!।

हर्ष बोधक

5. हर्ष बोधक– जिन शब्दों से खुशी का पता चलता है वहां हर्ष बोधक होता है।

जैसे- शाबाश! तुम ने कर दिखाया।

भय बोधक

6. भय बोधक– जिन शब्दों से भय का पता चलता हो वहां भय बोधक होता है।

जैसे- बाप रे! इतना अंधेरा।

आशीर्वाद बोधक

7. आशीर्वाद बोधक– जिन शब्दों से आशीर्वाद देने का पता चलता हो वहां आशीर्वाद बोधक होता है।

जैसे- खुश रहो!

विदास बोधक

8. विदास बोधक– इन शब्दों से कहीं आने या दोबारा मिलने का पता चलता हो वहां विदास बोधक शब्द लगता है।

जैसे- अच्छा! चलता हूं।

अनुमोदन बोधक-

9. अनुमोदन बोधक- जहां पर हां, हूं, जैसे शब्द लगते हो। जैसे- हां! तुम सही हो।

विवशताबोधक

10. विवशताबोधक – जहां पर चिंता हो वहां विवसति बोधक होता है। जैसे- काश! ऐसा ना हुआ होता।

दोस्तों यह थी हिंदी पार्ट्स ऑफ स्पीच की पूरी जानकारी। आशा करते हैं कि आपको हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। यदि आपको सच में हमारा ब्लॉग पसंद आया है तो इससे अवश्य शेयर करें ताकि और भी लोग हमारे इस ब्लॉग को पढ़ सके।

Conclusion – Parts of Speech Hindi me

दोस्तों इस आर्टिकल में हमने जाना Parts of Speech in Hindi के बारे में , 

मैंने अपनी तरफ से आपको Parts of Speech in Hindi कि सबसे अच्छी जानकारी देने कि कोशिश की है , आप कमेंट कर के बताइए कि आपको Parts of Speech in Hindi आर्टिकल कैसी लगी

और आप किस टॉपिक पर आर्टिकल चाहते है है कमेंट कर के जरुर बताइयेगा |

Parts of Speech in Hindi आर्टिकल को पूरा पढने के लिए आपका दिल से धन्यवाद

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